(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

Aadiparv (Mahabharat) - आदिपर्व (महाभारत)


॥ श्रीः ॥
1.26. अध्यायः 026
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Topics
स्तुत्या तुष्टेन इन्द्रेण कृतं जलवर्षणम्॥ 1 ॥
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Text

सौतिरुवाच। 1-26-0x(103)(1387)
एवं स्तुतस्तदा कद्र्वा भगवान्हरिवाहनः।
नीलजीमूतसंघातैः सर्वमम्बरमावृणोत्॥ 1-26-1(1388)
मेघानाज्ञापयामास वर्षध्वममृतं शुभम्।
ते मेघा मुमुचुस्तोयं प्रभूतं विद्युदुज्ज्वलाः॥ 1-26-2(1389)
परस्परमिवात्यर्थं गर्जन्तः सततं दिवि।
संवर्तितमिवाकाशं जलदैः सुमहाद्भुतैः॥ 1-26-3(1390)
सृजद्भिरतुलं तोयमजस्रं सुमहारवैः।
संप्रनृत्तमिवाकाशं धारोर्मिभिरनेकशः॥ 1-26-4(1391)
मेघस्तनितनिर्घोषौर्विद्युत्पवनकम्पितैः।
तैर्मेघैः सततासारं वर्षद्भिरनिशं तदा॥ 1-26-5(1392)
नष्टचन्द्रार्ककिरणमम्बरं समपद्यत।
नागानामुत्तमो हर्षस्तथा वर्षति वासवे॥ 1-26-6(1393)
आपूर्यत मही चापि सलिलेन समन्ततः।
रसातलमनुप्राप्तं शीतलं विमलं जलम्। 1-26-7(1394)
तदा भूरभवच्छन्ना जलोर्मिभिरनेकशः।
रामणीयकमागच्छन्मात्रा सह भुजंगमाः॥ ॥ 1-26-8(1395)

इति श्रीमन्महाभारते आदिपर्वणि पौलोमपर्वणि षड्विंशोऽध्यायः॥ 26 ॥

Mahabharata - Adi Parva - Chapter Footnotes
1-26-3 संवर्तः कल्पान्तः संजातोस्मिन्निति संवर्तितम्॥ 1-26-8 रामणीयकं रमणकसंज्ञं द्वीपम्॥ ष़ड्विंशोऽध्यायः॥ 26 ॥


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